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कुछ अनकही
मधुशाला माँ को भूल सकता हूँ मै मधुबाला को नहीं, मंदिर माजिद का रास्ता छोड़ सकता हूँ मधुशाला का नहीं। माँ अपनी महबूबा ...
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मधुशाला माँ को भूल सकता हूँ मै मधुबाला को नहीं, मंदिर माजिद का रास्ता छोड़ सकता हूँ मधुशाला का नहीं। माँ अपनी महबूबा ...
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यूँ कब तक देश को जलाते रहोगे, अंध आस्था, अंधश्रद्धा, अंधभक्ति, के नाम पर कब तक आग लगाते रहोगे।। कभी अराक्षण के नाम पर हिंसा करते हो, कभी एक...
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सर्दियां के आँगन में खुशीयों के फूल मुरझा रहे थे, जिंदगी के धगों को जितना सुलझाते, वर्फीली हवा के थपेड़े उन्हें और उलझा रहे थे। ...

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