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कुछ अनकही
मधुशाला माँ को भूल सकता हूँ मै मधुबाला को नहीं, मंदिर माजिद का रास्ता छोड़ सकता हूँ मधुशाला का नहीं। माँ अपनी महबूबा ...
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उजाले की इस रात में पडोसी का घर तम से क्यों घिरा है खुशी के इस पर्व में वह आज बेजान गम में क्यों पड़ा है चलो एक दीया आस का उसके आँ...
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सर्दियां के आँगन में खुशीयों के फूल मुरझा रहे थे, जिंदगी के धगों को जितना सुलझाते, वर्फीली हवा के थपेड़े उन्हें और उलझा रहे थे। ...
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मंडवे की रोटी तूने खायी नहीं है "खुदेड़" । कछ्बोळी तूने कभी चबाई नहीं है ।। 'बल' और 'ठैरा' तू भाषा में लगत...

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